Kamakhya Devi Temple: अंबुबाची मेले के लिए 4 दिन बंद रहेंगे मंदिर के कपाट, जानें क्या है इस अनोखी परंपरा का रहस्य

Religion News 2026:

असम के गुवाहाटी में नीलांचल पर्वत पर स्थित कामाख्या देवी मंदिर (Kamakhya Devi Temple) दुनिया भर में अपने चमत्कारों, रहस्यमयी मान्यताओं और तांत्रिक विद्याओं के लिए प्रसिद्ध है। हर साल की तरह इस बार भी यहां ऐतिहासिक अंबुबाची मेले (Ambubachi Mela 2026) की शुरुआत हो रही है। इस विश्व प्रसिद्ध मेले के दौरान मंदिर के कपाट पूरे 4 दिनों तक श्रद्धालुओं के लिए पूरी तरह से बंद रहेंगे।

आइए जानते हैं इस अनोखी परंपरा के पीछे का रहस्य और क्यों इन 4 दिनों में मंदिर के कपाट बंद रखे जाते हैं।

4 दिनों तक क्यों बंद रहते हैं मंदिर के कपाट?

कामाख्या देवी मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से सबसे प्रमुख और शक्तिशाली माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार दिनों में माता कामाख्या रजस्वला (Menstruation Cycle) अवस्था में होती हैं।

हिन्दू धर्म और मंदिर प्रशासन की परंपरा के अनुसार:

  • इन चार दिनों में मंदिर में किसी भी प्रकार की पूजा-पाठ वर्जित होती है।
  • माता के आराम और एकांत को ध्यान में रखते हुए मंदिर के मुख्य दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं।
  • इस दौरान आसपास के इलाकों में न तो शंख बजता है और न ही घंटियां बजाई जाती हैं।
  • चार दिन पूरे होने के बाद पूरे मंदिर की भव्य सफाई और शुद्धिकरण होता है, जिसके बाद भक्तों के लिए कपाट दोबारा खोल दिए जाते हैं।

अंबुबाची मेले (Ambubachi Mela) का विशेष महत्व

अंबुबाची मेले को ‘पूर्व का महाकुंभ’ भी कहा जाता है। यह समय तंत्र साधना के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।

  • तांत्रिकों का महाकुंभ: इन चार दिनों में देश-विदेश से हजारों अघोरी, नागा साधु और तांत्रिक नीलांचल पर्वत पर पहुंचते हैं। यह समय उनके लिए गुप्त सिद्धियां और शक्तियां प्राप्त करने का सबसे बड़ा अवसर होता है।
  • मूर्ति पूजा नहीं होती: आपको जानकर हैरानी होगी कि कामाख्या मंदिर में माता की कोई मूर्ति या चित्र नहीं है। यहां माता सती के ‘योनि’ भाग की पूजा की जाती है, जो एक प्राकृतिक कुंड के रूप में स्थित है।
  • ब्रह्मपुत्र नदी का लाल होना: स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इन चार दिनों में मंदिर के पास से बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी माता के रजस्वला होने के कारण लाल हो जाता है।

मिलता है अनोखा ‘रक्त वस्त्र’ प्रसाद

4 दिन बाद जब मंदिर के कपाट दोबारा खुलते हैं, तो भक्तों को एक बेहद खास और चमत्कारिक प्रसाद दिया जाता है जिसे रक्त वस्त्र (Rakta Vastra) कहा जाता है।

दरअसल, मंदिर के कपाट बंद करने से पहले माता के कुंड के पास एक सफेद कपड़ा बिछा दिया जाता है। जब चौथे दिन कपाट खुलते हैं, तो वह कपड़ा माता के रज से लाल रंग में रंगा हुआ मिलता है। इसी पवित्र लाल कपड़े को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर भक्तों को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। मान्यता है कि यह कपड़ा घर में रखने से हर तरह की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

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